श्री जयराम विद्यापीठ के संचालक ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने बच्चों की शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति को जरूरी बताया। उन्होंने युवाओं से मां-बाप और गुरु का सम्मान करने की अपील की।
हरियाणा (DESK) 08 SEP 2026। शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे संस्कार और संस्कृति भी बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी संदेश के साथ श्री जयराम विद्यापीठ के संचालक ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने युवाओं को मां-बाप और गुरु के सम्मान का महत्व समझाया। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कार्यक्रम में मौजूद अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने ऐसे समाज का सपना देखा था, जिसमें शिक्षा के साथ इंसानियत और संस्कार भी हों। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान की ओर से अलग-अलग शिक्षण संस्थानों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।
ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति का जुड़ाव भी जरूरी है। उनका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करना है, जो आगे चलकर देश और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि संस्थानों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति से जोड़कर स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी के सपने को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने मां-बाप और गुरु के सम्मान पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन में गुरु का आशीर्वाद और माता-पिता का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने माता-पिता और गुरु का हमेशा आदर और सम्मान करें। उनके अनुसार, जो बच्चा अपने माता-पिता और गुरु का सम्मान करता है, वह जीवन में आगे बढ़ने और सफलता
ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भविष्य में देश के किसी न किसी क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने शिक्षा को समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, पूर्व मंत्री जेपी दलाल, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, चेयरमैन सुभाष कलसाना, चेयरमैन रविंद्र सांगवान और चेयरमैन गुरनाम सैनी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे
ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी का संदेश साफ था कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहना भी उतना ही जरूरी है। उनका कहना था कि माता-पिता और गुरु के प्रति सम्मान की भावना बच्चे के व्यक्तित्व को मजबूत बनाती है और उसे जीवन में सही दिशा देने में मदद करती है।

