संयुक्त किसान मोर्चा पलवल ने गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने, शुगर मिल को 25 अक्टूबर तक शुरू कराने और फसल नुकसान पर ₹50 हजार प्रति एकड़ मुआवजे की मांग उठाई है। 22 सितंबर को शुगर मिल परिसर में किसान पंचायत होगी।
पलवल (SHOYAB) 9 सितंबर। गन्ने के दाम से लेकर शुगर मिल के संचालन और जलभराव से खराब हुई फसलों के मुआवजे तक कई मुद्दों को लेकर पलवल के किसानों ने आंदोलन की दिशा में अगला कदम तय कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा पलवल ने 22 सितंबर को पलवल शुगर मिल परिसर में किसान पंचायत बुलाने का ऐलान किया है। जाट धर्मशाला में हुई संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता अतर सिंह मेंबर गहलब ने की, जबकि संचालन मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने किया।
किसान नेताओं ने खेती की बढ़ती लागत और चीनी की कीमतों में वृद्धि का हवाला देते हुए गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल किए जाने की मांग उठाई है। हालांकि, मौजूदा समय में हरियाणा सरकार ने 2025-26 पेराई सीजन के लिए गन्ने का State Advised Price (SAP) ₹415 प्रति क्विंटल तय किया था। ऐसे में किसानों की ₹600 प्रति क्विंटल की मांग मौजूदा SAP से काफी अधिक है। इसी मांग को लेकर किसान संगठनों की ओर से प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी आवाज उठती रही है। अगस्त 2026 में सोनीपत में हुई किसान बैठक में भी गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग सामने आई थी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने पलवल शुगर मिल को इस बार 25 अक्टूबर तक हर हाल में शुरू करने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि मिल को समय पर शुरू कराने के लिए उन्हें हर साल आंदोलन करना पड़ता है, जिससे किसानों को परेशानी होती है। गौरतलब है कि जून 2026 में भी संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने शुगर मिल के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन देकर सीजन 2026-27 में मिल को 25 अक्टूबर तक चलाने और प्रबंधन मंडल के चुनाव कराने की मांग उठाई थी। वहीं, सितंबर की शुरुआत में पलवल शुगर मिल परिसर में गन्ना किसानों और मिल अधिकारियों की बैठक भी हुई थी, जिसमें आगामी पेराई सत्र की तैयारियों और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की गई थी।
किसान नेताओं ने शुगर मिल के प्रबंध निदेशक मंडल के चुनाव जल्द कराने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि करीब चार वर्षों से चुनाव नहीं हुए हैं। इसके साथ ही मिल की वार्षिक सामान्य बैठक यानी AGM भी जल्द बुलाने की मांग की गई है किसान नेताओं के अनुसार, मिल के प्रबंधन से जुड़े फैसलों में किसानों की भागीदारी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए इन प्रक्रियाओं का समय पर होना जरूरी है।
बैठक में किसानों ने जलभराव से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। किसान नेताओं के मुताबिक कई गांवों में पानी भरने से कपास, ज्वार, बाजरा और धान जैसी फसलों को नुकसान हुआ है। मोर्चा ने हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन से 2025 में हुए फसल नुकसान के लंबित मुआवजे का भुगतान करने और 2026 में जलभराव से खराब हुई फसलों की कराने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित किसानों को ₹50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग रखी गई है।
पलवल में फसल नुकसान और विशेष गिरदावरी का मुद्दा पहले भी किसान संगठनों की ओर से उठाया गया है। मार्च 2026 में संयुक्त किसान मोर्चा ने उपायुक्त को ज्ञापन देकर 2025 के फसल नुकसान के लंबित मुआवजे और प्रभावित क्षेत्रों में विशेष गिरदावरी की मांग की थी। हालांकि, ₹50 हजार प्रति एकड़ की राशि किसान मोर्चा की मांग है, सरकार द्वारा घोषित मुआवजा नहीं। पिछले वर्ष जलभराव से प्रभावित किसानों के लिए हरियाणा सरकार की ओर से अलग-अलग परिस्थितियों में मुआवजा देने और विशेष गिरदावरी की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा ने 6 सितंबर को मंडकोला में दहेज प्रथा और सामाजिक बुराइयों को लेकर हुई पंचायत के निर्णयों का भी स्वागत किया।इसके अलावा हरियाणा में चल रहे नगरपालिका और अग्निशमन कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देते हुए किसान नेताओं ने सरकार से कर्मचारियों की मांगों का समाधान बातचीत के जरिए करने की अपील की
बैठक में किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि 22 सितंबर की किसान पंचायत में गन्ने के भाव, शुगर मिल के संचालन, प्रबंधन मंडल के चुनाव और फसल मुआवजे समेत किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। बैठक को उदय सिंह सरपंच, रूप राम तेवतिया, ताराचंद प्रधान, डॉ. रघुवीर सिंह, करण सिंह आर्य, रमेश चंद सौरोत, राजकुमार ओलियान, किशन चंद शर्मा, ठाकुर लाल आर्य और नवल सिंह रावत सहित अन्य किसान नेताओं ने संबोधित किया।

