बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए इस्तीफे का व्यंग्यात्मक पोस्ट किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर FIR और गिरफ्तारी की मांग उठ रही है।
बालाघाट, मध्य प्रदेश (SHOYAB) 13 SEP 26। आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर मध्य प्रदेश का बालाघाट इन दिनों सुर्खियों में है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के एक कदम ने मामले को नया राजनीतिक और सोशल मीडिया विवाद दे दिया है। दीपके प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने बालाघाट के आदोरी, कोरका और बोंदारी जैसे गांवों में पहुंचे थे। लेकिन वहां उन्हें स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। उन पर सवाल उठाया गया कि वे इतनी देर से पीड़ित परिवारों के बीच क्यों पहुंचे।
मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के सवालों के जवाब में दीपके ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें जनता ने मुख्यमंत्री नहीं चुना है, इसलिए इस तरह के सवाल प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रशासन से किए जाने चाहिए। इसके बाद मामला यहीं नहीं रुका। दीपके ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा लेटर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उनका यह कदम गंभीर राजनीतिक घोषणा के बजाय व्यंग्य और तंज के तौर पर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक पोस्ट में उन्होंने सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाने की कोशिश की।
दरअसल, बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पहले से ही गंभीर बना हुआ है। मीडिया रिपोर्टों और एक जनहित याचिका में 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। अगस्त में शुरुआती रिपोर्टों में छह बच्चों की मौत और 100 से ज्यादा बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में मृतकों की संख्या बढ़ती गई। इस मामले में अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट कलेक्टर समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यानी मामला अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालत की निगरानी में भी जवाबदेही का सवाल उठ चुका है।
दीपके के इस्तीफे वाले पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स इसे सरकार पर व्यंग्य और राजनीतिक तंज बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी व्यक्ति द्वारा स्वयं को मुख्यमंत्री बताने और सरकारी पद से जुड़े प्रतीकों/लेटरहेड का इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग भी उठ रही है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसी किसी मांग को लेकर पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे अभी सोशल मीडिया पर उठ रही मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी दर्ज आपराधिक मामले के रूप में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मूल मुद्दा बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों की लगातार हो रही मौत और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल हैं। दीपके ने अपने दौरे के दौरान प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और सरकार से स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। दूसरी तरफ उनके दौरे के दौरान कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने उन पर ‘लाशों पर राजनीति’ करने का आरोप लगाया, जिसके बाद मौके पर तीखी बहस भी हुई। अब दीपके के ‘CM इस्तीफा’ पोस्ट ने इस पूरे विवाद को एक और मोड़ दे दिया है। क्या यह सिर्फ राजनीतिक व्यंग्य था या सरकारी पद के नाम और प्रतीकों के इस्तेमाल पर कोई कानूनी कार्रवाई होती है? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा ह
अभिजीत दीपके प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे दौरे के दौरान उनसे तीखे सवाल और बहस हुई इसके बाद उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए व्यंग्यात्मक इस्तीफा पोस्ट किया। पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर FIR और गिरफ्तारी की मांग उठ रही है। अभी FIR या गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

