लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की ₹2,799 की बकाया किस्त को लेकर युवक को कथित तौर पर बंधक बनाने, मारपीट और ब्लड बैंक ले जाकर जबरन खून निकलवाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
लखनऊ (SHOYAB) 15 SEP 26 । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोबाइल की एक छोटी-सी EMI को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिकवरी एजेंटों की वसूली के तरीके और उनकी कथित मनमानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगोहां थाना क्षेत्र में एक युवक के परिवार ने आरोप लगाया है कि मोबाइल की ₹2,799 की बकाया किस्त वसूलने के लिए उसे कथित तौर पर घर से ले जाया गया, कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ मारपीट की गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि युवक को एक ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया और बाद में उसे सदर इलाके के एक मकान में कथित तौर पर बंधक बनाकर मजदूरी कराई गई। हालांकि, खून बेचने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पीड़ित युवक नेवल कुमार ने करीब एक साल पहले निगोहां की एक मोबाइल दुकान से लगभग ₹21,500 का सैमसंग मोबाइल जीरो डाउन पेमेंट पर खरीदा था। उसकी 12 महीने की किस्त करीब ₹2,799 तय हुई थी। परिवार का आरोप है कि किस्त बकाया रहने के बाद दुकान से जुड़े लोग पहले मोबाइल वापस ले गए। इसके करीब एक साल बाद 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ ले गए।
नेवल और उसके परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के अनुसार, युवक को लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में ले जाकर कई दिनों तक बंधक रखने और वहां उससे जबरन मजदूरी कराने का आरोप है। परिवार का कहना है कि इस दौरान युवक को लगातार धमकाया गया और उस पर बकाया किस्त का पैसा देने का दबाव बनाया गया।
मामले में वसूली का एक और आरोप सामने आया है। परिवार के मुताबिक आरोपियों ने नेवल के फोन से उसके बड़े भाई से संपर्क किया और मोबाइल की किस्त के नाम पर ₹2,799 ऑनलाइन मंगवाए। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार का आरोप है कि रकम मिलने के बाद भी युवक को नहीं छोड़ा गया और बाद में करीब ₹12,500 की अतिरिक्त रकम मांगी गई। पैसे नहीं देने पर युवक को जान से मारने और गोमती नदी में फेंकने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
परिवार के मुताबिक युवक के घर नहीं लौटने के बाद उसकी तलाश शुरू हुई। बाद में मामला पुलिस और अधिकारियों तक पहुंचा। DCP दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रिकवरी एजेंट शुभम सिंह और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस ने आरोपियों की भूमिका और युवक को कथित तौर पर बंधक बनाने से लेकर ब्लड बैंक ले जाने तक के पूरे घटनाक्रम की जांच के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि शुरुआती शिकायत के बाद उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली। इसके बाद वे DCP दक्षिणी के पास पहुंचे। DCP ने मामले की जांच के साथ-साथ पुलिस की तरफ से किसी तरह की लापरवाही हुई है या नहीं, इसकी भी जांच कराने की बात कही है।
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशेगी पुलिस
इस मामले में कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा—
युवक को उसके साथ ले जाने वाले लोग कौन थे?
क्या वे वास्तव में किसी फाइनेंस कंपनी या मोबाइल दुकान से जुड़े रिकवरी एजेंट थे?
युवक को ब्लड बैंक कौन ले गया और वहां वास्तव में क्या हुआ?
खून निकलवाने और उसे बेचने के आरोप में कितनी सच्चाई है?
₹2,799 लेने के बाद अतिरिक्त रकम क्यों मांगी गई?
युवक को कथित तौर पर कितने समय तक बंधक रखा गया
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि कर्ज या EMI की वसूली के नाम पर किसी व्यक्ति को धमकाने, बंधक बनाने या उसके साथ जबरदस्ती करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। अब देखना होगा कि जांच में आरोप कितने सही साबित होते हैं और पुलिस आरोपियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई करती है।

