लोहिया ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव के हाथ में आने के बाद यूपी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सपा और यादव परिवार पर तीखा हमला बोला। राजभर ने कहा कि शिवपाल पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन अखिलेश पर नहीं
लखनऊ (SHOYAB) 15 SEP 26। समाजवादी पार्टी में लोहिया ट्रस्ट की कमान शिवपाल सिंह यादव से अखिलेश यादव के हाथ में आने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के रिश्तों को लेकर तीखा बयान दिया है। राजभर ने कहा कि शिवपाल यादव पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन अखिलेश यादव पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिवपाल के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए अखिलेश पर भी सवाल खड़े किए।
ओमप्रकाश राजभर ने शिवपाल यादव के उस दौर को याद किया जब उन्होंने समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई थी। राजभर के मुताबिक, उस समय शिवपाल यादव ने सपा नेतृत्व और पार्टी को लेकर खुलकर बयानबाजी की थी।राजभर ने दावा किया कि शिवपाल ने उस दौर में समाजवादी पार्टी पर ‘चोर-उचक्कों और माफियाओं की पार्टी’ जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। ऐसे में राजभर का सवाल है कि जब शिवपाल पहले ही अखिलेश से अलग होकर अपनी पार्टी बना चुके थे और सपा के खिलाफ मुखर रहे थे, तो अखिलेश उन पर पूरी तरह भरोसा कैसे कर सकते हैं।
दरअसल, 14 सितंबर को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का नया अध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी सामने आई। इससे पहले इस ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल सिंह यादव के पास थी और वह 2017 से इसकी कमान संभाल रहे थे रिपोर्टों के मुताबिक ट्रस्ट की बैठक में मौजूद सभी आठ सदस्यों ने अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति जताई। यानी इसे केवल परिवार के भीतर लिए गए एकतरफा फैसले के तौर पर पेश करना पूरी तस्वीर नहीं होगी। अब अखिलेश यादव के पास समाजवादी पार्टी के साथ लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की भी जिम्मेदारी है। यही वजह है कि इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओमप्रकाश राजभर ने लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी अखिलेश को मिलने को शिवपाल के साथ पुराने राजनीतिक मतभेदों से जोड़ते हुए कहा कि जब दोनों के बीच पहले राजनीतिक दूरी इतनी बढ़ गई थी, तो अखिलेश का अपने चाचा पर पूरी तरह भरोसा न करना स्वाभाविक है। हालांकि, यह राजभर का राजनीतिक आकलन और बयान है। अखिलेश यादव ने लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालने के पीछे अविश्वास को आधिकारिक कारण नहीं बताया है। उपलब्ध रिपोर्टों में ट्रस्ट के सभी सदस्यों की सहमति से अखिलेश को अध्यक्ष बनाए जाने की बात सामने आई है।
शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक रिश्ते उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। दोनों के बीच मतभेदों के बाद शिवपाल ने अलग पार्टी बनाई थी, लेकिन बाद में वह दोबारा समाजवादी पार्टी के साथ आ गए। अब लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी भी अखिलेश के पास आने के बाद चाचा-भतीजे के राजनीतिक समीकरण को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा और सहयोगी दलों के नेता इस फैसले को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियों के बीच बयानबाजी पहले ही तेज हो चुकी है। ऐसे में लोहिया ट्रस्ट जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव और उस पर सत्ता पक्ष के नेताओं की टिप्पणियां आने वाले दिनों में सियासी बहस को और धार दे सकती हैं। फिलहाल ओमप्रकाश राजभर का ‘शिवपाल पर भरोसा, अखिलेश पर नहीं’ वाला बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं लोहिया ट्रस्ट की नई जिम्मेदारी के साथ अखिलेश यादव ने सपा के संगठन और उससे जुड़े प्रमुख संस्थानों पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

