हरियाणा रोडवेज के पूर्व कंडक्टर राम कुमार से जुड़े 108 रुपये के राजस्व नुकसान के मामले का 36 साल बाद अंत हुआ। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए विभागीय कार्रवाई को सही ठहराया।
Chandigarh Siddarth ( Desk ) 11 June 2026। महज 108 रुपये के राजस्व नुकसान से शुरू हुआ हरियाणा रोडवेज के एक पूर्व कंडक्टर का मामला 36 साल बाद आखिरकार समाप्त हो गया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व कंडक्टर राम कुमार की अपील खारिज करते हुए विभाग द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को सही ठहराया है। इसके साथ ही तीन दशक से अधिक समय से चल रहा यह कानूनी विवाद खत्म हो गया।
मामला वर्ष 1989 का है, जब जींद डिपो में तैनात हरियाणा रोडवेज के कंडक्टर राम कुमार पर आरोप लगा था कि उन्होंने कुछ यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करने दी, जिससे सरकारी राजस्व को 108 रुपये का नुकसान हुआ। विभागीय जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक वार्षिक वेतन वृद्धि (इन्क्रीमेंट) स्थायी रूप से रोक दी गई और निलंबन अवधि से जुड़े वेतन-भत्तों में भी कटौती की गई।
राम कुमार ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी। शुरुआती दौर में ट्रायल कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए विभागीय कार्रवाई को रद्द कर दिया था और माना था कि उन्हें जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई तथा पर्याप्त सुनवाई का अवसर नहीं मिला।
हालांकि बाद में जिला अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया और विभागीय कार्रवाई को वैध माना। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा, जहां लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने भी जिला
फैसले को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि जांच रिपोर्ट और कारण बताओ नोटिस कर्मचारी को उपलब्ध कराए गए थे तथा उन्होंने उनका जवाब भी दिया था। ऐसे में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान बस में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री मौजूद थे और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य विभागीय कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पर्याप्त हैं।
करीब 36 साल तक चले इस मामले के अंत में हाईकोर्ट ने पूर्व कंडक्टर की अपील खारिज कर दी, जिससे 1989 में शुरू हुआ 108 रुपये के नुकसान का यह बहुचर्चित विवाद आखिरकार समाप्त हो गया।

