पलवल के सरकारी अस्पताल में सांप के काटने से पीड़ित युवती के साथ कथित झाड़-फूंक की तस्वीर सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे। जून में अस्पताल ने एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध होने की जानकारी दी थी।
पलवल (SHOYAB)। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के दावे लगातार किए जाते हैं। लेकिन पलवल से सामने आई एक तस्वीर ने इन दावों के बीच एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन से मांगा जाना चाहिए। मामला सांप के काटने से जुड़ा बताया जा रहा है। सामने आई तस्वीर में एक युवती अस्पताल परिसर में दिखाई दे रही है और उसके साथ कथित तौर पर झाड़-फूंक की जा रही है। तस्वीर को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, तस्वीर में दिखाई दे रही घटना की पूरी परिस्थितियों और यह स्पष्ट नहीं है कि झाड़-फूंक किसने और किस अनुमति से की, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है।
अगर अस्पताल में इलाज था तो झाड़-फूंक क्यों?
सर्पदंश को हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की मानक उपचार गाइडलाइन में सांप के काटने के मामलों के लिए चिकित्सकीय प्रबंधन और एंटी-स्नेक वेनम संबंधी प्रोटोकॉल दिए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर की योजना में भी सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचाने, चिकित्सकीय जांच और जरूरत पड़ने पर एंटीवेनम उपचार को महत्वपूर्ण बताया गया है। ऐसे में पलवल की इस तस्वीर को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर मरीज अस्पताल पहुंच चुकी थी, तो उसके इलाज के साथ झाड़-फूंक जैसी गतिविधि अस्पताल परिसर में क्यों दिखाई दी?
क्या पलवल अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है?
इस सवाल का एक महत्वपूर्ण संदर्भ भी सामने आता है। जून 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में जिला नागरिक अस्पताल, पलवल के एसएमओ के हवाले से कहा गया था कि अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की व्यवस्था और आवश्यक एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन तथा दवाइयां उपलब्ध थीं। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी पलवल के सिविल अस्पताल को न्यू सोहना रोड, आगरा चौक के पास स्थित जिला अस्पताल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
यही वजह है कि अब सामने आई तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। क्या उस समय भी एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध था? मरीज की चिकित्सकीय जांच हुई थी या नहीं? उसे कौन-सा उपचार दिया गया? और अस्पताल परिसर में झाड़-फूंक की अनुमति किसने दी?
तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर बढ़ाई चर्चा
स्थानीय स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मरीजों की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। कहीं दवाइयों को लेकर सवाल उठते हैं तो कहीं इलाज में देरी या मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने की बातें सामने आती हैं। लेकिन सर्पदंश का मामला सामान्य बीमारी से अलग है। इसमें समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यकता पड़ने पर एंटीवेनम उपचार महत्वपूर्ण माना जाता है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सर्पदंश कार्ययोजना भी जिला अस्पतालों और सीएचसी में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने तथा एंटीवेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देती है।
अंधविश्वास नहीं, समय पर इलाज जरूरी
सांप के काटने के बाद मरीज को झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या अन्य पारंपरिक उपायों में समय गंवाने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलाना जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन में भी घाव पर जड़ी-बूटी या अन्य पदार्थ लगाने तथा पारंपरिक उपचारों को प्रभावी उपचार के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे में इस तस्वीर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि मरीज को सही समय पर सही चिकित्सा मिली या नहीं।
अब अस्पताल प्रशासन से इन सवालों के जवाब जरूरी
युवती को सांप ने कब और कहां काटा?
उसे किस समय सरकारी अस्पताल लाया गया?
क्या उसकी डॉक्टर ने जांच की?
क्या एंटी-स्नेक वेनम उस समय उपलब्ध था?
मरीज को कौन-सा उपचार दिया गया ?
अस्पताल परिसर में झाड़-फूंक किसने की?
क्या अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी थी?
क्या मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही तस्वीर की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल यह मामला केवल एक तस्वीर तक सीमित नहीं है। यह सवाल उस व्यवस्था पर है, जहां सर्पदंश जैसे गंभीर मामले में मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद किस तरह का उपचार मिला। अब निगाह स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर है।

