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Haryana News: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तालाबों में बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी डालने पर रोक लगाने के निर्देश दिए। 320 तालाबों का नवीनीकरण और 467 नए तालाबों पर काम शुरू होगा।
चंडीगढ़ (SHOYAB)। हरियाणा के गांवों में तालाब अब सिर्फ पानी जमा करने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें साफ-सुथरे और बेहतर सार्वजनिक स्थानों के रूप में विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हरियाणा पॉन्ड एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी की बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी तालाब में गंदा पानी सीधे नहीं पहुंचना चाहिए। सरकार की योजना है कि गांवों से निकलने वाले पानी को पहले वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जाए और उसके बाद ही तालाब में छोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने साथ ही 320 तालाबों के नवीनीकरण एवं सौंदर्यीकरण का काम जल्द पूरा करने और 467 नए तालाबों पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
20 हजार से ज्यादा तालाब, अब रखरखाव पर भी फोकस
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा में कुल 20,100 तालाब हैं। इनमें 19,219 ग्रामीण और 881 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें प्रदूषित और ओवरफ्लो होने वाले तालाबों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जा रहा है। सरकार अब गांवों के ग्रे और ब्लैक वाटर को तालाबों तक पहुंचने से पहले ट्रीट करने की व्यवस्था पर काम कर रही है। इसके लिए माइक्रो एसटीपी और अन्य वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया गया है।
तालाब किनारे योगशाला और ओपन जिम भी
सरकार सिर्फ तालाबों की सफाई तक सीमित नहीं रहना चाहती। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन गांवों में अभी योगशालाएं नहीं हैं, वहां तालाबों के आसपास शेड के साथ योगशाला और ओपन जिम विकसित किए जाएं। इसका मकसद तालाबों को ग्रामीणों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थान बनाना है। लोगों की नियमित आवाजाही बढ़ेगी तो तालाबों के रखरखाव और स्वच्छता में भी ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
नई तकनीक से तालाबों का पानी होगा बेहतर
बैठक में तालाबों के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए मैकेनिकल एरेशन और नैनोबबल टेक्नोलॉजी जैसी तकनीकों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन तकनीकों को पहले कुछ स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। अगर परिणाम बेहतर रहे तो इन्हें दूसरे तालाबों तक भी विस्तार दिया जाएगा।
320 तालाबों का काम तेज होगा, 467 नए तालाब चिन्हित
मुख्यमंत्री ने चल रहे 320 तालाबों के नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण के काम को तेजी से पूरा करने को कहा है। इसके साथ ही 467 नए तालाबों को चिन्हित कर वहां विकास कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले से विकसित हो चुके तालाबों के रखरखाव के लिए भी विशेष अभियान चलाने की बात कही गई है। सोलर पंपों और उनके आसपास पानी के फिल्ट्रेशन की व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा गया है।
तालाबों की शिकायत के लिए बनेगा नया सिस्टम
तालाबों की स्थिति पर आम लोग भी शिकायत कर सकें, इसके लिए सरकार एक नया डिजिटल मैकेनिज्म तैयार करने जा रही है। यह व्यवस्था ‘म्हारी सड़क’ ऐप की तर्ज पर होगी। इसमें कोई व्यक्ति तालाब की खराब स्थिति, सफाई या सुधार से जुड़ी शिकायत लोकेशन टैगिंग के साथ दर्ज कर सकेगा। शिकायत संबंधित सरपंच और अधिकारियों तक पहुंचेगी, ताकि कार्रवाई की जा सके।
रखरखाव में लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि तालाबों के नवीनीकरण, सौंदर्यीकरण और रखरखाव में जिस अधिकारी की जिम्मेदारी होगी, उसकी जवाबदेही भी तय की जाएगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई है। हर जिले में एडीसी स्तर पर समीक्षा बैठक कर यह रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए गए हैं कि गांवों में बनाई गई समितियों ने तालाबों के रखरखाव के लिए अब तक क्या काम किया है।
पहले भी सरकार दे चुकी है तालाबों को लेकर निर्देश
गौर करने वाली बात है कि तालाबों को प्रदूषण से बचाने का मुद्दा सरकार की प्राथमिकताओं में पहले से रहा है। मई 2026 में भी मुख्यमंत्री ने untreated wastewater को सीधे तालाबों में जाने से रोकने और पानी के उपचार के लिए थ्री-पॉन्ड ट्रीटमेंट सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए थे। उस समय सरकारी आंकड़ों में हरियाणा में 20,039 तालाब बताए गए थे। अब अगस्त की बैठक में सरकार ने तालाबों के नवीनीकरण, नए तालाबों, माइक्रो एसटीपी, डिजिटल शिकायत प्रणाली और सार्वजनिक सुविधाओं को एक साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं।
गांवों के तालाब बनेंगे आकर्षण का केंद्र?
सरकार का दावा है कि साफ पानी, बेहतर परिसर और सुविधाओं के साथ तालाबों को गांवों की खूबसूरती से जोड़ा जाएगा। लेकिन असली चुनौती सिर्फ नए काम शुरू करना नहीं, बल्कि काम पूरा होने के बाद तालाबों का नियमित रखरखाव और गंदे पानी की रोकथाम होगी। अगर प्री-ट्रीटमेंट और निगरानी की व्यवस्था जमीन पर ठीक से लागू होती है, तो ग्रामीण इलाकों के पुराने तालाबों को दोबारा उपयोगी और आकर्षक सार्वजनिक स्थानों में बदला जा सकता है।

