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Haryana News: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पुराने ईंटों से बने 466 वाटर वर्क्स को करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से RCC आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य शुद्ध पेयजल और बेहतर जलापूर्ति है।
नई दिल्ली (DESK)। हरियाणा में लोगों को साफ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने पुराने वाटर वर्क्स को अपग्रेड करने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की बैठक में निर्देश दिए कि ऐसे पुराने वाटर वर्क्स, जहां भूमिगत पानी के मिल जाने से पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, उन्हें RCC आधारित वाटर वर्क्स में बदला जाए। सरकार के मुताबिक, ईंटों से बने 466 वाटर वर्क्स को RCC आधारित बनाने पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
भूजल मिलने से पानी की गुणवत्ता पर असर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन वाटर वर्क्स में भूमिगत पानी के मिश्रण के कारण पानी में TDS, हार्डनेस और फ्लोराइड की मात्रा बढ़ रही है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार किया जाए। सरकार का मानना है कि पानी की गुणवत्ता खराब होने पर उसे पीने योग्य बनाने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट और मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में पुराने ढांचे को RCC आधारित करना दीर्घकालिक समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
ट्यूबवेल की जगह नहरी पानी पर जोर
सरकार अब सिर्फ पुराने जलघरों को मजबूत करने तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जहां संभव हो, वहां ट्यूबवेल आधारित वाटर वर्क्स को नहरी पानी आधारित सिस्टम में बदला जाए। इसका मकसद भूजल पर निर्भरता कम करना और भविष्य में जलस्तर को बेहतर करने की दिशा में काम करना है।
हरियाणा में इतने बड़े स्तर पर चल रही जलापूर्ति व्यवस्था
बैठक में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल 1,888 नहरी पानी आधारित वाटर वर्क्स और 4,199 बूस्टिंग स्टेशन संचालित हैं। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति के लिए 12,404 ट्यूबवेल और पांच रेनीवेल योजनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग के अनुसार 3,674 ट्यूबवेल संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपे जा चुके हैं।
नए वाटर वर्क्स और बूस्टिंग स्टेशन भी बनेंगे
बढ़ती आबादी और पानी की जरूरत को देखते हुए सरकार कई नई परियोजनाओं पर भी काम कर रही है।
विभाग के मुताबिक:
103 नए नहरी आधारित वाटर वर्क्स
1,065 नए ट्यूबवेल
369 नए बूस्टिंग स्टेशन
2 नई रेनीवेल योजनाएं
लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि नए वाटर वर्क्स की क्षमता भविष्य में बढ़ने वाली आबादी को ध्यान में रखकर तय की जाए।
1,525 किलोमीटर पानी की पाइपलाइन बदलेगी
जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुराने वितरण नेटवर्क को भी बदला जा रहा है। प्रदेश में करीब 7,005 किलोमीटर का वितरण नेटवर्क मौजूद है, जिसमें से 1,525 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बदलने की योजना है। विभाग के अनुसार, इसमें से मार्च 2027 तक 837 किलोमीटर नेटवर्क बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का फोकस सिर्फ पाइपलाइन पर नहीं
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्रदेशवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। सरकार की योजना में एक तरफ पुराने वाटर वर्क्स का ढांचा मजबूत करना शामिल है, वहीं दूसरी तरफ नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ाना, पाइपलाइन बदलना और नई जलापूर्ति परियोजनाएं शुरू करना भी शामिल है।
भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता सुधारने की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का असर आने वाले वर्षों में भूजल स्तर पर भी दिखाई देने की उम्मीद है। भूजल पर निर्भरता कम होने से पानी की गुणवत्ता में सुधार और गिरते जलस्तर पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। अब चुनौती इन योजनाओं को तय समय में जमीन पर उतारने की होगी। खासतौर पर 466 पुराने वाटर वर्क्स को RCC आधारित बनाने और 1,525 किलोमीटर वितरण नेटवर्क बदलने का काम पूरा होने के बाद ही इसका वास्तविक असर लोगों तक पहुंच पाएगा।

