दिल्ली के ओखला फेज-1 में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से एक मजदूर की मौत हो गई और चार लोग घायल हुए हैं। पुलिस के मुताबिक सिलेंडर वाहन से उतारते समय सड़क पर गिरा और धमाका हो गया। मामले की जांच जारी है।
नई दिल्ली (DESK) 9 सितंबर। दिल्ली के ओखला फेज-1 में बुधवार सुबह ऑक्सीजन सिलेंडर में हुए धमाके से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। घटना की पुष्टि दिल्ली पुलिस और कई प्रमुख रिपोर्टों ने की है। पुलिस के अनुसार, घटना D-23, ओखला फेज-1 स्थित एक गोदाम में हुई। सुबह करीब 10:43 बजे ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाने में PCR कॉल के जरिए सिलेंडर ब्लास्ट की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, SM Traders से जुड़े कर्मचारी गोदाम में कमर्शियल ऑक्सीजन सिलेंडर उतार रहे थे। सिलेंडर लेकर एक Tata 407 वाहन वहां पहुंचा था।
पुलिस के अनुसार, वाहन से सिलेंडर उतारने के दौरान एक ऑक्सीजन सिलेंडर सड़क पर गिर गया, जिसके तुरंत बाद उसमें जोरदार धमाका हो गया। प्रारंभिक जांच में सिर्फ एक सिलेंडर के फटने की बात सामने आई है। हालांकि, सिलेंडर आखिर किस वजह से फटा, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने साफ किया है कि घटना का तकनीकी कारण विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।
हादसे में करीब 35 वर्षीय मोहित सिंह, निवासी जयपुर, की मौके पर ही मौत हो गई। वह SM Traders में हेल्पर/वर्कर के तौर पर काम करता था और बताया जा रहा है कि पिछले करीब तीन वर्षों से फर्म से जुड़ा था। वहीं, नाम के चार अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी को तत्काल इलाज के लिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। पुलिस उनकी पहचान और मेडिकल स्थिति से जुड़ी जानकारी भी सत्यापित कर रही है। प्रारंभिक खबरों में भी हादसे में एक व्यक्ति की मौत और चार लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, D-23 स्थित परिसर का इस्तेमाल SM Traders के गोदाम के रूप में किया जा रहा था। फर्म कथित तौर पर औद्योगिक ऑक्सीजन सिलेंडरों की ट्रेडिंग और स्थानीय सप्लाई का काम करती है। पुलिस के मुताबिक, यहां ऑक्सीजन भरने का कोई प्लांट नहीं मिला। सिलेंडर कथित तौर पर गाजियाबाद से भरे हुए आते थे और इसके बाद ओखला तथा आसपास के इलाकों में स्थानीय कारोबारियों और औद्योगिक इकाइयों को सप्लाई किए जाते थे। प्रारंभिक जानकारी में रोजाना करीब 70 से 80 सिलेंडरों के हैंडलिंग की बात सामने आई है, लेकिन पुलिस इस आंकड़े को स्टॉक रजिस्टर, बिल, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों से सत्यापित कर रही है।
हादसे के बाद अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ऑक्सीजन सिलेंडरों के भंडारण, रखरखाव, हैंडलिंग और परिवहन के लिए जरूरी अनुमति और लाइसेंस मौजूद थे या नहीं।साथ ही सिलेंडर कहां से आए थे, सप्लायर की जानकारी क्या है और सिलेंडरों की वास्तविक मालिकाना/एजेंसी किसकी है, इन पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर लिया है। अब तकनीकी और फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सिलेंडर गिरने के बाद उसमें धमाका किन परिस्थितियों में हुआ। यानी फिलहाल सिलेंडर गिरने के बाद धमाका होना प्रारंभिक जांच में सामने आया है, लेकिन विस्फोट का तकनीकी कारण अभी तय नहीं हुआ है। इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञों की जांच का इंतजार किया जा रहा है। ओखला फेज-1 में हुए इस हादसे पर शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में भी यही बताया गया है कि घटना के बाद दमकल और राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की तथा कारण की जांच जारी है।

