हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री को लेकर शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और CJP के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जानिए पूरा विवाद और दोनों पक्षों का क्या कहना है।
चंडीगढ़ (DESK)। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश, फोटो-वीडियो और निरीक्षण को लेकर सरकार की सख्ती के बीच शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान चला रही कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP आमने-सामने आ गए हैं मामला सिर्फ स्कूल में प्रवेश का नहीं है। एक तरफ सरकार बच्चों की सुरक्षा और स्कूल परिसर में अनुशासन का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ CJP का कहना है कि सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाने के लिए उसका अभियान जारी रहेगा।
ढांडा बोले- बिना अनुमति स्कूल में एंट्री नहीं
शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा है कि सरकारी स्कूल किसी के लिए भी मनमाने तरीके से आने-जाने की जगह नहीं हैं। उनका कहना है कि स्कूलों में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए निर्धारित अनुमति जरूरी है। सरकार की ओर से जारी व्यवस्था के मुताबिक बाहरी व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश से पहले प्रक्रिया का पालन करना होगा। रिपोर्टों के अनुसार प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के बिना बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू तथा रिकॉर्डिंग को लेकर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
ढांडा का तर्क है कि स्कूलों में बच्चे पढ़ते हैं और किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। उन्होंने गांव के स्कूलों को स्थानीय समुदाय की महत्वपूर्ण संस्था बताते हुए सरपंच और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की भूमिका पर भी जोर दिया है।
CJP बोली- स्कूलों की हालत दिखाने से पीछे नहीं हटेंगे
दूसरी ओर CJP ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। संगठन इन दिनों ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चला रहा है और उसका दावा है कि हरियाणा के कई सरकारी स्कूलों का दौरा किया जा चुका है। CJP के प्रदेश प्रवक्ता सुधीर सांगवान के मुताबिक, संगठन के सदस्य अब तक हरियाणा के करीब 15 स्कूलों का दौरा कर चुके हैं। उनका कहना है कि वे स्थानीय लोगों और सरपंचों के निमंत्रण पर स्कूलों तक पहुंचते हैं और अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाना है।
CJP का कहना है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े सवालों को उठाना जरूरी है। संगठन ने साफ किया है कि वह अपने अभियान को रोकने वाला नहीं है।
विवाद के बीच सरकार ने स्कूलों के विकास पर भी उठाए कदम
इस पूरे विवाद के बीच स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर सरकार की ओर से भी काम किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जर्जर भवन, कमरों, चारदीवारी और शौचालय जैसी जरूरतों से जुड़े करीब 2,800 विकास कार्यों को पूरा करने के लिए पहले चरण में 130 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यानी विवाद के दोनों पक्षों के तर्क अलग हैं। सरकार का फोकस स्कूल परिसर की सुरक्षा और अनुमति व्यवस्था पर है, जबकि CJP का जोर स्कूलों की कमियों को सार्वजनिक रूप से सामने लाने पर है।
अब सवाल- स्कूलों की निगरानी कैसे होगी?
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी स्कूलों की निगरानी और उनकी कमियों की जांच का ऐसा कौन सा तरीका हो, जिससे बच्चों की सुरक्षा भी बनी रहे और स्कूलों की जमीनी समस्याएं भी सामने आती रहें। फिलहाल शिक्षा मंत्री के सख्त रुख और CJP के अभियान जारी रखने के ऐलान के बाद यह विवाद जल्द खत्म होता नजर नहीं आ रहा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार स्कूल निरीक्षण और बाहरी लोगों की एंट्री को लेकर नियमों को कितना सख्ती से लागू करती है और CJP अपने अभियान को किस तरह आगे बढ़ाती है।
नोट: CJP के बयान और उसके अभियान से जुड़े दावे संगठन/मीडिया रिपोर्टों के आधार पर हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित सरकारी निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय आदेश और सूचनाएं उपलब्ध हैं।

