कुलगुरु प्रो. दिनेश कुमार बोले-सभी प्रोग्राम वर्ल्ड जॉब मार्केट को ध्यान में रखकर डिजाइन, फ्रेंच भाषा भी इस सत्र से शामिल
पलवल (डेस्क) | श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी (SVSU) अब वैश्विक रोजगार बाजार में अपनी मजबूत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यूनिवर्सिटी ने अपने सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों को अंतरराष्ट्रीय जॉब मार्केट की जरूरतों के अनुरूप डिजाइन किया है, ताकि छात्र सीधे वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
शनिवार को आयोजित समीक्षा बैठक में कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में दुनिया भर में स्किल्ड मैनपावर की भारी कमी है, जबकि रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी ने अपने 65 से अधिक प्रोग्राम्स को इंडस्ट्री और ग्लोबल मार्केट के अनुसार तैयार किया है।
उन्होंने बताया कि छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विदेशी भाषाओं को अनिवार्य किया गया है। जर्मन और जापानी के बाद इस सत्र से फ्रेंच भाषा भी बीवॉक (B.Voc) प्रोग्राम में जोड़ी गई है। वर्तमान में दुनिया के 29 देशों में फ्रेंच आधिकारिक भाषा है, जबकि जर्मन छह देशों में उपयोग की जाती है। जापान भी एक बड़ी आर्थिक शक्ति है, जहां ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
कुलगुरु ने कहा कि यूरोप में एग्रीकल्चर फार्म मैनेजर की भारी मांग को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने इस वर्ष बीएससी एग्रीकल्चर शुरू किया है, जबकि डीवॉक और बीवॉक एग्रीकल्चर पहले से संचालित हैं।
एविएशन सेक्टर में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए बीबीए एयरलाइंस एंड एयरपोर्ट मैनेजमेंट और पीजी डिप्लोमा इन एयरपोर्ट ऑपरेशंस एंड मैनेजमेंट जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के साथ एमओयू के तहत छात्रों को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक मांग को ध्यान में रखते हुए इस सत्र में बीएससी नर्सिंग, बीएससी फिजियोथेरेपी, डी. फार्मा, बी. फार्मा, बीएससी योगा और मेडिकल लैबोरेटरी साइंस में बैचलर एवं मास्टर प्रोग्राम्स शुरू किए गए हैं।
प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि स्किल्ड युवाओं के लिए रोजगार की कोई कमी नहीं है, लेकिन इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता अभी भी चुनौती बनी हुई है। यूनिवर्सिटी का लक्ष्य अधिक से अधिक युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़कर उन्हें पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़ाते हुए सीधे जॉब मार्केट में स्थापित करना है।
