सुशांत सिंह राजपूत की मौत के करीब छह साल बाद कूपर अस्पताल के पूर्व मॉर्चरी स्टाफ रूपकुमार शाह का पुराना दावा फिर वायरल है। जानिए गले के निशानों को लेकर उन्होंने क्या कहा और AIIMS-सीबीआई जांच का निष्कर्ष क्या रहा।
बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की जून 2020 में हुई मौत से जुड़ी बहस एक बार फिर सोशल मीडिया पर तेज हो गई है। इसकी वजह कूपर अस्पताल के पूर्व मॉर्चरी स्टाफ सदस्य रूपकुमार शाह का करीब चार साल पुराना बयान है, जिसमें उन्होंने अभिनेता के शरीर और गर्दन पर कुछ ऐसे निशान देखने का दावा किया था, जिन्हें उन्होंने सामान्य फांसी के मामले से अलग बताया था शाह का यह बयान दिसंबर 2022 में सामने आया था। उन्होंने दावा किया था कि सुशांत के शरीर पर कई निशान थे और गर्दन पर दो-तीन निशान दिखाई दिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें मामला आत्महत्या जैसा नहीं लगा था। हालांकि, उस समय भी उनके दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र चिकित्सकीय प्रमाण सामने नहीं आया था।
रूपकुमार शाह के मुताबिक, वह सुशांत के पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद थे। उन्होंने दावा किया था कि अभिनेता की गर्दन पर दबाव के निशान दिखाई दिए थे और उनके अनुभव के आधार पर उन्हें ये निशान सामान्य फांसी के निशानों से अलग लगे। उनका कहना था कि उन्होंने इस बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी दी थी, लेकिन उनके दावे के मुताबिक उनकी बात पर आगे कार्रवाई नहीं हुई। शाह ने इसी आधार पर मामले में संभावित फाउल प्ले की आशंका जताई थी।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है—शाह के बयान को आधिकारिक पोस्टमार्टम निष्कर्ष नहीं माना गया था। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र चिकित्सकीय प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया था।
यही वह सवाल है जिसके कारण यह पुराना बयान बार-बार सोशल मीडिया पर चर्चा में आता है। लेकिन गर्दन पर किसी प्रकार का निशान दिखना अपने आप में हत्या साबित नहीं करता। 2020 में सार्वजनिक हुई एक स्वतंत्र फोरेंसिक समीक्षा में सुशांत की गर्दन पर V-आकार का निशान देखा गया था, जिसे विशेषज्ञ ने फांसी के अनुरूप बताया था। उस समीक्षा में यह भी कहा गया था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आत्महत्या या हत्या का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। इसलिए सोशल मीडिया पर किसी एक तस्वीर या पुराने बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि निशान निश्चित रूप से गला दबाने की वजह से थे, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
मामले की जांच के दौरान CBI ने AIIMS के विशेषज्ञों से भी फोरेंसिक राय ली थी। 2025 में सामने आई जानकारी के अनुसार, AIIMS के पांच डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने उपलब्ध फोरेंसिक सामग्री और जांच से जुड़े तथ्यों की समीक्षा के बाद सुशांत की मौत को आत्महत्या माना और हत्या की संभावना को खारिज किया। यानी आधिकारिक जांच के उपलब्ध निष्कर्षों के मुताबिक मामला हत्या का साबित नहीं हुआ।
सुशांत की मौत से जुड़ी चर्चाएं पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर दोबारा सामने आती रही हैं। इस बार भी रूपकुमार शाह के पुराने बयान को नए घटनाक्रम और सोशल मीडिया पोस्ट के साथ जोड़कर शेयर किया जा रहा है। लेकिन पुराने दावे और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है। एक तरफ शाह ने अपने अनुभव के आधार पर गंभीर आशंका जताई थी, जबकि दूसरी तरफ AIIMS की मेडिकल समीक्षा और CBI की जांच ने आत्महत्या के निष्कर्ष का समर्थन किया।
आधिकारिक जांच का निष्कर्ष इसके विपरीत रहा है, जबकि रूपकुमार शाह का दावा एक अलग और अप्रमाणित आरोप के रूप में दर्ज है। सुशांत की मौत 14 जून 2020 को मुंबई स्थित उनके फ्लैट में हुई थी। छह साल बाद भी उनका नाम सोशल मीडिया पर चर्चा में आता है, लेकिन किसी पुराने दावे को नया तथ्य मानने से पहले उसके आधिकारिक और फोरेंसिक रिकॉर्ड से मिलान करना जरूरी है।

