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Faridabad News: बीके अस्पताल के PPP मोड वाले मेडिट्रीना हार्ट सेंटर से सामान बाहर ले जाने के दौरान दो ट्रक रोके गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, जबकि बकाया भुगतान को लेकर कंपनी और स्वास्थ्य विभाग के दावे अलग-अलग हैं।
फरीदाबाद (DESK)। बीके सिविल अस्पताल में PPP मोड पर संचालित मेडिट्रीना हार्ट सेंटर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सेंटर बंद होने के बाद कथित तौर पर वहां से महंगी चिकित्सा मशीनरी और अन्य सामान बाहर ले जाने की कोशिश की गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दो ट्रकों को रुकवा दिया। एक ट्रक में सामान लदा हुआ था, जबकि दूसरे में सामान लोड किए जाने की तैयारी बताई गई। मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि हार्ट सेंटर का सामान बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी थी और क्या इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की औपचारिक मंजूरी मौजूद थी?
छुट्टी के दिन सामान निकालने का आरोप
मामले की शिकायत करने वाले अधिवक्ता संजय गुप्ता के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली थी कि बीके अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित मेडिट्रीना हार्ट सेंटर से मशीनें और अन्य उपकरण ट्रकों में लोड किए जा रहे हैं। उन्होंने मौके पर पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सामान निकालते समय मौके पर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई अधिकृत निगरानी नहीं थी। इसके बाद 112 पर सूचना दी गई और पुलिस मौके पर पहुंची।
हालांकि, सामान चोरी किए जाने की बात फिलहाल आरोप के स्तर पर है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सामान किसका था और उसे बाहर ले जाने के लिए वैध अनुमति थी या नहीं।
8.50 करोड़ के बकाये पर कंपनी और स्वास्थ्य विभाग आमने-सामने
इस पूरे विवाद का दूसरा पहलू करीब 8.50 करोड़ रुपये के कथित भुगतान से जुड़ा है।
हार्ट सेंटर से जुड़े कर्मचारी का दावा है कि सरकार की ओर करीब 8.50 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। उनके मुताबिक, इस संबंध में 21 जुलाई को CMO, DGHS और संबंधित अधिकारियों को पत्र भी दिया गया था। कंपनी का कहना है कि भुगतान को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकला। दूसरी तरफ सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि विभाग की ओर कोई 8.50 करोड़ रुपये बकाया नहीं हैं और जो बिल आए थे, उनका भुगतान किया जा चुका है।
यानी एक तरफ कंपनी बकाया राशि की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोई ऐसी पेंडेंसी नहीं है। यही विवाद अब पूरे मामले का अहम हिस्सा बन गया है।
CMO बोले- बिना अनुमति सामान नहीं ले जाया जा सकता
सिविल सर्जन के मुताबिक, हार्ट सेंटर प्रबंधन की ओर से सामान बाहर ले जाने की कोशिश की जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को सूचना देकर सामान की निकासी रुकवाई और मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेज दी है। CMO का कहना है कि अनुबंध की शर्तों के तहत इस तरह सामान बाहर नहीं ले जाया जा सकता। मुख्यालय से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस को दिखाया गया अनुमति का पत्र
मौके पर पहुंचे जांच अधिकारी राजकुमार के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि बीके अस्पताल में PPP मोड पर चलने वाले हार्ट सेंटर का सामान दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, सामान ले जाने वाले व्यक्ति ने खुद को गुरुग्राम स्थित सेंटर का प्रमुख बताया और दावा किया कि सामान मूव करने के लिए CMO, PMO और उच्च अधिकारियों से अनुमति मिली है।
मौके पर एक पत्र भी दिखाया गया, जिसके बारे में बताया गया कि वह व्हाट्सऐप के माध्यम से प्राप्त हुआ था। अब पुलिस यह जांच करेगी कि यह पत्र वास्तव में CMO या PMO कार्यालय की ओर से जारी किया गया था या नहीं।
हार्ट सेंटर पहले ही हो चुका है बंद
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बीके अस्पताल का हार्ट सेंटर पहले ही बंद हो चुका है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मेडिट्रीना प्रबंधन ने भुगतान संबंधी विवाद के बीच सेंटर बंद कर सामान समेटना शुरू किया था। स्वास्थ्य निदेशालय अब सेंटर को दोबारा शुरू करने के लिए वैकल्पिक कंपनी तलाश रहा है। मेडिट्रीना को वर्ष 2018 में बीके अस्पताल में PPP मॉडल के तहत हार्ट सेंटर चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। सेंटर में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सेवाएं उपलब्ध थीं।
अब पुलिस जांच से खुलेगा पूरा मामला
फिलहाल पुलिस ने दोनों ट्रकों को मौके पर रुकवा दिया है। अब जांच का फोकस तीन मुख्य सवालों पर रहेगा—सामान किसका है, उसे बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी और वास्तव में कितनी राशि का भुगतान लंबित है। इस मामले में पहले से ही हार्ट सेंटर को लेकर विवाद रहे हैं। वर्ष 2024 में भी सेंटर के उपकरणों और खरीद से जुड़ी शिकायतों पर विजिलेंस कार्रवाई की खबर सामने आई थी।
ऐसे में इस नए विवाद ने स्वास्थ्य विभाग और मेडिट्रीना के बीच चल रहे मतभेद को एक बार फिर सामने ला दिया है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सामान ले जाने की कोशिश नियमों के मुताबिक थी या नहीं।

