हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) जिला नोडल अधिकारी के रूप में स्कूलों की सुरक्षा, मिड-डे मील, आधारभूत सुविधाओं, शिक्षण गुणवत्ता और डिजिटल संसाधनों की नियमित निगरानी करेंगे

चंडीगढ़ | (SHOYAB) हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद राज्य के सभी जिलों में अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) को सरकारी स्कूलों का जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं से लेकर विद्यार्थियों की सुरक्षा, मिड-डे मील, शिक्षण गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक हर व्यवस्था की निगरानी सीधे जिला प्रशासन करेगा। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (DEEO), डिप्टी डीईओ, डीपीसी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और सरकारी स्कूलों के प्राचार्य अब स्कूलों से जुड़े कार्यों में एडीसी के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में कार्य करेंगे।
स्कूलों का होगा औचक निरीक्षण
नई व्यवस्था के तहत एडीसी समय-समय पर सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं, शिक्षण व्यवस्था, विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति, अनुशासन तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेजी जाएगी ताकि कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।
जर्जर भवनों में नहीं बैठेंगे विद्यार्थी
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को असुरक्षित या जर्जर भवनों में पढ़ाई नहीं कराई जाएगी। एडीसी ऐसे भवनों की पहचान कर उन्हें कंडम घोषित कराने की प्रक्रिया को तेज करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगे। जिलावार रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी ताकि नए भवनों के निर्माण और मरम्मत के कार्य में तेजी लाई जा सके।
मिड-डे मील और स्वच्छता पर रहेगा विशेष फोकस
अब सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता पर भी प्रशासन की सीधी नजर रहेगी। एडीसी पके हुए भोजन, कच्चे राशन, पेयजल, पानी की टंकियों की साफ-सफाई, शौचालयों और स्कूल परिसर की स्वच्छता की नियमित जांच करेंगे। किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर संबंधित स्कूल मुखिया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल संसाधनों का होगा प्रभावी उपयोग
सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में उपलब्ध स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों का नियमित उपयोग हो। एडीसी इन संसाधनों की कार्यशील स्थिति की समीक्षा करेंगे और खराब पड़े उपकरणों को शीघ्र दुरुस्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा का पूरा लाभ मिल सके।
शिक्षण गुणवत्ता और उपस्थिति पर भी रहेगी नजर
एडीसी केवल आधारभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्कूलों में शिक्षण गुणवत्ता, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति, अनुशासन और शिक्षा विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की भी नियमित समीक्षा करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर विशेष निरीक्षण दल गठित कर औचक निरीक्षण भी कराया जा सकेगा।
जवाबदेही होगी और मजबूत
शिक्षा विभाग का मानना है कि जिला स्तर पर एडीसी को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपने से सरकारी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ेगी, आधारभूत सुविधाओं में सुधार होगा और विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस व्यवस्था से शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
