पलवल में संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 10 अगस्त को DC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन और जेल भरो आंदोलन की तैयारी है। किसान-मजदूरों ने MSP, कर्जमाफी, बिजली और रोजगार समेत कई मांगें उठाई हैं।
पलवल (SHOYAB) 9 अगस्त। संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय आह्वान के तहत पलवल में किसान और मजदूर संगठन 10 अगस्त को जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन और जेल भरो आंदोलन करेंगे। आंदोलन को लेकर किसान नेताओं ने जिले के कई गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाकर किसानों और मजदूरों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों के मुताबिक, यह कार्यक्रम भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में किए जा रहे विरोध कार्यक्रमों का हिस्सा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 10 अगस्त को देशभर में विभिन्न स्थानों पर विरोध कार्यक्रमों का आह्वान किया है।
इन मुद्दों को लेकर होगा प्रदर्शन
किसान संगठनों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली क्षेत्र में निजीकरण की आशंकाओं, किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी, किसान-मजदूरों की कर्जमाफी, चार श्रम संहिताओं, बेरोजगारी और महंगाई सहित कई मुद्दों को आंदोलन का आधार बनाया है। आयोजकों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग भी शामिल है। यह उनकी मांग है, न कि वर्तमान न्यूनतम वेतन दर।
गांव-गांव पहुंचकर जुटा रहे समर्थन
आंदोलन की तैयारियों के तहत संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद घुघेरा, रूपराम तेवतिया और ताराचंद प्रधान ने घुघेरा, धतीर, अल्लिका, दादूपुर, महेशपुर, गहलब, औरंगाबाद और मीतरोल समेत कई गांवों में जनसंपर्क किया।नेताओं ने ग्रामीणों से 10 अगस्त को पलवल पहुंचकर आंदोलन में भाग लेने की अपील की।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों की चिंता
किसान नेताओं ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि कृषि क्षेत्र पर ऐसे प्रावधान लागू होते हैं जो अमेरिकी कृषि उत्पादों से सीधी प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हैं, तो छोटे और सीमांत भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा पहले भी भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर विरोध दर्ज करा चुका है और MSP की कानूनी गारंटी तथा किसानों के कर्जमाफी समेत कई मांगें उठा चुका है।
एग्री डिस्कॉम को लेकर भी विरोध
बिजली के मुद्दे पर किसान संगठनों ने हरियाणा में प्रस्तावित हरियाणा एग्री डिस्कॉम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए अलग बिजली वितरण कंपनी बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य कृषि उपभोक्ताओं और कृषि फीडरों के लिए बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाना है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नई कंपनी को कृषि क्षेत्र के लिए अलग वितरण व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं, किसान और बिजली कर्मचारी संगठनों का एक वर्ग इसे बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में कदम मानते हुए इसका विरोध कर रहा है।
पलवल में कल जुटेंगे किसान-मजदूर
किसान नेताओं ने कहा कि 10 अगस्त के प्रदर्शन में जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल होंगे। उनका कहना है कि आंदोलन के जरिए केंद्र सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई जाएंगी। संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर भी 10 अगस्त को आंदोलन का आह्वान किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे मुद्दों में कृषि, श्रम और व्यापार नीतियों से जुड़े सवाल प्रमुख हैं।
अब देखना होगा कि पलवल में होने वाले इस प्रदर्शन में कितनी संख्या में किसान और मजदूर पहुंचते हैं और प्रशासन इस प्रदर्शन को लेकर क्या व्यवस्था करता है।

