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UP News: शिक्षक दिवस पर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान चलाया। अखिलेश यादव ने बंद स्कूलों को दोबारा खोलने की मांग उठाई, जबकि सरकार का कहना है कि स्कूल बंद नहीं किए गए, बल्कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को मर्ज या पेयर किया जा रहा है।
लखनऊ (DESK)। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी ने ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान के जरिए योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। सपा का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हजारों सरकारी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल बंद या मर्ज किए गए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। समाजवादी पार्टी ने शिक्षक दिवस को केवल शिक्षकों के सम्मान तक सीमित न रखते हुए इसे सरकारी स्कूलों के मुद्दे से जोड़ दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे स्कूलों के आसपास कार्यक्रम आयोजित किए, जिन्हें सपा बंद या मर्ज किए गए स्कूल बता रही है। कुछ जगहों पर बच्चों को पढ़ाई की सामग्री भी बांटी गई।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस अभियान के जरिए सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने अभियान का संदेश रखा—“बंद स्कूल खुलेगा, तो PDA पढ़ेगा।” अखिलेश यादव का कहना है कि बंद किए गए प्राथमिक विद्यालयों को दोबारा खोला जाना चाहिए, ताकि गांवों के बच्चों को उनके आसपास ही शिक्षा मिल सके। सपा का दावा है कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में 26 हजार से ज्यादा सरकारी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल बंद किए गए हैं। पार्टी इस संख्या को भाजपा सरकार के कार्यकाल से जोड़ते हुए इसे ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है।
अखिलेश यादव पहले भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं और स्कूलों के बंद होने या दूर मर्ज होने का असर इन्हीं परिवारों पर ज्यादा पड़ता है। हालांकि, सपा के आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष अलग है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि सरकार ने किसी स्कूल को बंद करने का फैसला नहीं किया है। सरकार के मुताबिक कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को आसपास के विद्यालयों के साथ पेयर या मर्ज किया जा रहा है।
सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से शिक्षकों और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। मंत्री के अनुसार जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है, उन्हें करीब एक किलोमीटर के दायरे में दूसरे स्कूलों के साथ जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा खाली पड़े स्कूल परिसरों का इस्तेमाल बाल वाटिका जैसी शैक्षणिक सुविधाओं के लिए किए जाने की बात भी सरकार की ओर से कही गई है। यानी जहां सपा इसे स्कूल बंद करने का मुद्दा बता रही है, वहीं सरकार इसे कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के संसाधनों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बता रही है।
5 सितंबर को सपा के इस अभियान का असर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में देखने को मिला। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने सभी 75 जिलों में ‘PDA पाठशाला’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना के तहत कार्यक्रम किए। इसका उद्देश्य स्कूलों के मुद्दे को गांव और आम लोगों के बीच उठाना था। सपा ने इस अभियान के जरिए शिक्षकों का सम्मान करने के साथ उन स्कूलों की स्थिति को भी मुद्दा बनाया, जिन्हें पार्टी बंद या मर्ज किए जाने का दावा कर रही है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी स्कूलों का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है। सपा इस मामले को ग्रामीण शिक्षा, गरीब परिवारों और PDA वर्ग से जोड़कर सरकार पर हमला कर रही है। अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो बंद किए गए स्कूलों को दोबारा खोलना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
वहीं भाजपा सरकार स्कूलों के मर्जर को शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जोड़कर देख रही है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच सरकारी स्कूलों का मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। पूरे विवाद की मुख्य वजह यही है कि सपा इसे स्कूलों के बंद होने का मुद्दा बता रही है, जबकि सरकार इसे मर्जर और पेयरिंग की प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है। सपा का कहना है कि स्कूलों को आसपास के दूसरे विद्यालयों में मिलाने से बच्चों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ सकती है, जबकि सरकार का तर्क है कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के विद्यालयों के साथ जोड़कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है।
फिलहाल शिक्षक दिवस पर शुरू हुआ ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा और सरकारी स्कूलों के मुद्दे को फिर से केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

